Wednesday, 13 May 2020

हमारी शिक्षा व्यवस्था कैसी हो (Hamari shiksha vyavstha kaisi ho)


प्यासे को नीर पिलायें हम
भूखे को अन्न खिलायें हम
निर्धन को वस्त्र दिलायें हम
ऐसी हो शिक्षा प्रणाली
ज्ञान से भरे भारत की थाली
समाज से हो समायोजन
मिल बांटकर खाए हम भोजन
कौशलयुक्त बने यह शिक्षा
शिक्षित युवक ना मांगें भिक्षा
जान से भी ज्यादा हमको इस वतन से प्यार रहे
भारत माँ की सेवा को हम सदा - सदा तैयार रहें
सांप्रदायिकता का नाम ना हो
भेदभाव का का काम ना हो
शिक्षा में हो बालक मध्यवर्ती
अमन चैन बांटें ये धरती
ताकि भारत पढ़ता जाए
भाईचारा बढ़ता जाए
मूल्यों में सबसे अव्वल आए , भारत का भी नाम बढ़े
भारत की शिक्षा प्रणाली श्री अटल और श्री कलाम गढ़े
स्मृति पर रुक ना जाए
चिंतन स्तर तक दौड़ लगाए
बोझ ना बने बस्ते हमारे, शिक्षा भी व्यवहार की हो
सौम्य वातावरण में शिक्षा सृजन और आपसी प्यार की हो
 

Monday, 11 May 2020

विज्ञान : वरदान या अभिशाप (Science : boon or curse )


यूँ तो मानो तकनीकी से हमने तारे तोड़ लिए
अंतरिक्ष में खूब उपग्रह सब देशों ने छोड़ लिए
स्वास्थ्य के क्षेत्र में कितना उत्थान किया हमने
समुद्रों की शुद्धि से उनका जलपान किया हमने
प्रसिद्ध हुए वैज्ञानिक और सब देशों की शान बनें
लाखों मील की दूरी नापे ऐसे वायुयान बने
अज्ञानता से दूर हुए हम,रही ना कोई भ्रांति
संचार की कछुआ चाल में सहसा आई क्रांति
विद्युत सी उपलब्धि ने जीवन को सरल बनाया है
पहाड़ सी ठोस समस्या को हमने अब तरल बनाया है
विज्ञान ही सर्वेसर्वा है लगता यह दावा झूठा है
ओजोन सदृश परत का पेट आज क्यों फूटा है
मजदूरों के हाथ काट दिए वैज्ञानिक मशीनों ने
भारी विपदा झेली है जल ,जंगल ,जमीन इन तीनों ने
परमाणु हथियारों से अब सारा जग भयभीत है
तकनीकी ने दुर्बलों पर हासिल की कैसी जीत है
कोरोना सा कोहराम ये विश्वपटल पर छाता क्यों
घोर संकट की सुनकर कहानी आंखों से खून जो आता क्यों
यूँ लगता खुद के लिए काल कलेवा सजा रहा
बढता हुआ प्रदूषण जो खतरे की घंटी बजा रहा

Sunday, 10 May 2020

भरतखण्ड के युवा (Bharatkhand ke yuva) तुम जागो @युवाजागरण


भरतखण्ड के युवा तुम निद्रा से उठकर अब जागो
तकनीकी के युग में तुम अज्ञान के पीछे ना भागो
पाश्चात्य की चकाचौंध में क्यों भारत को खोते हो
आकर्षण को प्यार समझकर क्यों जीवनभर रोते हो
व्हाटसएप के वीर लड़ाई स्टेटस पर लड़ते हो
शौर्य गाथा कौन पढ़े मजाक वतन का पढ़ते हो
फेसबुक पर नकली चेहरे समय गुजारने का ज़रिया
विपदाओं के बीच भारत कैसे पार करे दरिया
आलस्य में सुषुप्त है,भारतीय खून जवानी का
सीना छलनी ना कर देते हत्यारों की मनमानी का
बहन सुरक्षित नहीं किसी की महल ,मकानों,सड़कों में
ऐसी दुर्बुद्धि कहाँ से आई भारत माँ के लड़कों में
कलयुग के इस कालखण्ड में अपराधों का घोर है
ईमानदार को कुचल दिया अब भी दुष्टों का दौर है
परवाह नहीं किसी को मानों मुफ्त मिलीं आजादी है
विषधर सोशल मीडिया भी भारत की बर्बादी है
दो अंकों कमी रही तो क्यों फांसी पर झूल गए
समय ज़रा अनुकूल था, वीरों की शहादत भूल गए
भारत का अन्न खाया है, तुम भी तो आभास करो
दो कर कमल दिये ईश्वर ने तुम्हें,तुम भी तो कुछ खास करो

Saturday, 9 May 2020

बहनों के लिए कविता (A poem for sisters)

भूगोल से खगोल तक बहनों ने नाम कमाया है
बहनों के तेज़ प्रताप से भाग्य भी ज़रा सरमाया है
जिस भाई के बहन नहीं,उसका जीवन एक रोना है
भाई - बहन के संबंध को दिल से मानें तो  सोना है
पवित्रता का अद्वितीय परिचायक त्योहार यह रक्षाबंधन है
बहन बिना भाई का जीवन सदा रहा क्रन्दन है
जिस घर बहन नहीं है उस घर देवों का प्रवेश नहीं
बहन उपस्थित हो जाए तो कोई खूबी शेष नहीं
मध्यकाल में बहनों को अंधविश्वासों ने जकड़ा था
असीम प्रतिभा के सागर को कुप्रथाओं ने पकड़ा था
धीरे -धीरे फिर से उनकी शिक्षा की शुरुआत हुई
सबसे अव्वल आई बहनें बड़ी खुशी की बात हुई
मन में जब ठानी तो उन्होंने ज्ञान और कौशल का पता दिया
अवसर मिलते ही बहनों ने मुहं पर दुनिया को बता दिया
संस्कार और संस्कृति को गांव - गांव ले जाती है
सारी दुनिया को, सभ्यता का वो पैगाम सुनाती है
समय रहते समझकर बहनों का गुणगान करो
मानव रथ के इस भाग का तन - मन से सम्मान करो
दूध से उज्ज्वल मूल्यों में ना पाश्चात्य की दुर्गंध करो
अपनी हो या हो परायी शिक्षा का प्रबंध करो

Friday, 8 May 2020

ग्रामीण आँचल की छटा (GRAMIN ANCHAL KI CHHATA)

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ब्रह्ममुहूर्त की चांदनी में कोयल गीत सुनाती है
ये छटा ग्रामीण आँचल की मेरे अंतर्मन को भाती है
हुआ सूर्योदय स्वच्छता,स्नान और ध्यान किया
नमस्कार जो किया बड़ों को और मूल्यों का ज्ञान किया
रूखा -सूखा किया कलेवा,वह हल लेकर तैयार हुआ
कैसे बैठे निठल्ला,उसको धरती से जो प्यार हुआ
कानन में अब गया ग्वाला पशु चारण की तैयारी में
खेतिहर मजदूर पहुंच गए पराये खेत की क्यारी में
बच्चे तो दिनभर मिट्टी में खेल खेलते रहते हैं
दुश्मन हो या दोस्त वे तो सबको अपना कहते हैं
हुए प्रचण्ड रवि, ज़रा आराम फ़रमाना चाहता है
उज्ज्वल मन की प्रियतमा से भोजन खाना चाहता है
तनिक देर विश्रांति पर उठकर फिर हुंकार भरी
मिट्टी से ही करने लगा वो अपनी बातें प्यार भरी
शीतल हुए भास्कर,अब गोधूलि वेला आई है
गायें घर को लोट रही मानों संग मेला लाई हैं
पक्षी आये आशियाने में, हुई जो संध्या आरती
सच्चे भारत के कार्यों से प्रफुल्लित हुई मां भारती
थके हुए चेहरे से आंखें अब भोजन को ताक रही
बच्चों से मिलने को काया दिनभर जो बेबाक रही
जो मिला वही मुकद्दर उसने तकदीर को नहीं कोसा है
रोटी -सब्जी के संग प्रिया ने दूध और दही परोसा है
दिनभर की दिनचर्या से उसने अपनी गलती याद किया
ना अहित मैं करूं किसी का ईश्वर से फ़रियाद किया
ना हो कभी भी बैर भाव मुझमें और मेरे अपनों में
कल्याणकारी सोच वो रखता रात्रि के सपनों में

पत्थरबाजी छोड़ो,शिक्षा से नाता जोड़ो


कश्मीरी घाटी में अब पत्थर बरसाना छोड़ो तुम
आंतकियों की गाना है तो,भारत का खाना छोड़ो तुम
भारत के स्वर्ग में कोलाहल मचाकर रखा है
आज भी घाटी में क्यों आतंक बचाकर रखा है?
गद्दारी की साजिश को सत्ता बार बार ना माफ करे
राहों पर बढ़ने से पहले चप्पलों से कंकड़ साफ़ करे
बार बार पीटा जाता है भारत माँ के प्यारों को
पनाह घरों में दी जाती है सेना के हत्यारों को
नन्ही आँखें छिपकर कोने में बार बार जो रोती है
कुछ पत्थर दिल इंसानों को तो पीड़ा भी नहीं होती है
नीम और करेला का संयोग हुआ क्यों घाटी में
खरपतवार कहाँ से आया इस सोने की माटी में
कठपुतलियों का खेल ये जो खुब हुआ अब बंद करो
बेकारी छोड़ो और जागो शिक्षा का प्रबंध करो
गद्दारी घर से ना हो तो कोई कैसे प्रहार करे
भेड़ियों (आतंकी) की क्या औकात जो सोते शेरों पर वार करे
दो टूक भारत कहता है ज्ञान से नाता जोड़ो तुम
पिछला वक्त अब चला गया,पत्थर बरसाना छोड़ो तुम

Sunday, 3 May 2020

कोरोना का कोहराम और सुखद सवेरा (CORONA KA KOHRAM AUR SUKHAD SAVERA)

मानव की वैज्ञानिक जिद्द से मानवता भी हारी है
कोरोना के कोहराम से पस्त ये दुनिया सारी है
सुनसान है सड़के वह जो जलधारा सी बहती थी
विकल है भारत माता जो थोड़े तो सुख में रहती थी
जनजीवन अब व्यथित है पीछे बैठ किवाडों से
यूं लगता है, भारत मां पर पत्थर टूटे पहाड़ों से
सावधानी सीख लीजिए और जागरूकता लाना है
कोरोना से लड़ने में भारत को अव्वल आना है
खूब साथ दिया है अब तक सत्ता के गलियारों नें
तन,मन,धन से सेवा की है भारत मां के प्यारों ने
निर्दोषों पर प्रहार किया है कोरोना के तीरों ने
लगातार तैनाती दी है भारत मां के वीरों ने
उम्मीदों पर अडिग है रहना, जीवन पटरी पर आएगा
अंधियारा छठ जाएगा और सुखद सवेरा आएगा
कोरोना पर भारतवासी फिर गीत खुशी के गाएंगे
या तो यूं ही रुक जाता है,नहीं तो तब तक वैक्सीन बनाएंगे
लौटेगा मानव संसाधन, उद्योगों और बाजारों में
रंग वही चमकेंगे फिर से तीज और त्योहारों में
जीवन एक सफर है जिसमें पत्थर भी आ जाते हैं
बुद्धि और अध्यात्म से हम जीत हमेशा जाते हैं

          " एक सलाम कोरोना योद्धाओं के नाम"


         देश हित में कार्य करें एवं कोरोना से जीतने में सहायता           करें।


          जय हिंद ,जय भारत,जय भारतीय वीर,जय भारतीय।            सेना,जय कोरोना योद्धा