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Thursday, 17 October 2019

मेरे शिक्षक मेरी पहचान, मेरी शान- शिक्षक दिवस स्पेशल


नमस्कार ब्लॉगर परिवार


जो सुना न पाया आज तक वह गीत सुनाने आया हूं
जो दिल में गाता है मेरा, वह संगीत सुनाने आया हूं
क्या खूब कहूं यह आपके प्यार की कहानी है
भले ही दुनिया क्यों ना कह दे कि यह मनमानी है
पर यदि मैं वीर था तो अभिनंदन बना दिया आपने
अगर मैं गीत था तो वंदन बना दिया आपने
यदि मैं हल्दी था तो चंदन बना दिया आपने
यदि मै धड़कन था तो स्पंदन बना दिया आपने
परोपकारी झरने हो आप और ज्ञान के सागर हो
आप ही हो साक्षात् प्रभु,आप ही गिरिधर नागर हो
आपकी कृतज्ञता से मुकर जाऊं तो यह सबसे बड़ा पाप है
सच कहूं तो विद्या के इस मंदिर में आप ही मां-बाप है जीत की जंग छेड़ने को आपका एक वाक्य काफी है
कितनी बार टाला आपने और कितनी बार दिया माफ़ी है
सही कहूं तो आप लोहे को सोना बना सकते हो
वह कलाकार हो आप जो अव्यवस्थित मिट्टी को खिलौना बना सकते हो
सारी दुनिया कहती है आप राष्ट्र के निर्माता हो
जी हां सही सुना आप ही भारत भाग्य विधाता हो
अगर यह फूल खिला तो आपके भी गुणगान होंगे
मैं बड़ा बन पाऊं या नहीं हमेशा मेरे लिए महान होंगे
बस यही कहना है मेरा,मैं शांति और चैन पर अमन करता हूं।
मैं राजेन्द्र आप सभी गुरुजनों को नमन करता हूं


धन्यवाद ब्लॉगर परिवार
जय हिंद जय भारत जय भारतीय वीर जय भारतीय सेना










Thursday, 7 February 2019

अध्यापक के बारे में.........

नमस्कार ब्लॉगर परिवार
इस दुनिया में  परोपकार और असीम प्रेम का पर्याय यदि किसी शब्द को समझा जाए तो एक ही उत्तर निकल कर आता है, वह है गुरु। गुरु में हमारे माता पिता, हमारे आदर्श या हमारे शिक्षक शामिल हो सकते हैं।
वास्तव में एक शिक्षक के परोपकार से उऋण होने में सात जन्म का समय भी कम पड़ सकता है।
एक शिक्षक हमेशा अपनी जिंदगी के बेशकीमती समय की अपने विद्यार्थियों के हित में आहुति देता है।
भोजन करना सीखने से लेकर दुनिया के बड़े से बड़े अविष्कार में भी किसी गुरु की प्रत्यक्ष या पर्दे के पीछे की भूमिका अवश्य होती है।
हमारी माता से लेकर हर एक व्यक्ति जो हमारे काम आता है वह हमारा गुरु होता है
शिक्षक शब्द जिसे अंग्रेजी में टीचर (TEACHER)  कहा जाता है का मेरे अनुसार शाब्दिक अर्थ कुछ इस प्रकार है-
1.  T-Trainer( प्रशिक्षक)
2.  E-Encouraging( प्रोत्साहक)
3.  A-Architect( शिल्पकार या निर्माता जो देश के भावी।       कर्णधारों को शिक्षा देकर एक सभ्य इंसान बनाता है)
4.  C-Creator( सृजनकर्ता जो विद्यार्थियों के माध्यम से           देश को कुछ नया सृजित करके देता है)
5.  H- Helper( सहायक )
6.  E-Evaluator( मूल्यांकनकर्ता)
7.  R-Resistor( प्रतिरोधक जो विद्यार्थी को अनुचित काम      करने से रोकता है
अध्यापक के पास नौसिखिया बालक के रूप में गिली मिट्टी होती है जिससे वह दीपक बना सकता है जो सभी को प्रकाशमान करें या फिर कुल्हड़ जिसे दाह संस्कार के समय अवधि के साथ ले जाया जाता है।
अध्यापक अधिगम की रीड की हड्डी होता है। अध्यापक अधिगम की प्रक्रिया को कई प्रकार से नई चाल दे सकता है। अधिगम को रुचिपूर्ण बनाने में अध्यापक महती भूमिका होती है। अध्यापक अधिगम को रुचि पूर्ण बनाने में कुछ इस प्रकार के कार्य कर सकता है-
1- अपने विषय की प्रश्नोत्तरी का आयोजन करवाना।
2- विद्यार्थियों के सत्रीय कार्य को प्रदर्शनी के रूप में करवाना।
3- पढ़ाते समय विभिन्न चलचित्रों से संबंधित तथा अन्य जीवंत उदाहरणों का सहारा लेकर अधिगम का करवाना।
4- सभी विद्यार्थियों को समान प्यार देना ।
5- प्रत्येक विद्यार्थी से संबंध रखना तथा उसकी समस्याओं को जानना।

इस प्रकार गुरु संपूर्ण शिक्षण प्रक्रिया की नौका को चलाने वाला नाविक होता है और दुनिया का नायक होता है शिक्षा की गाथाओं का गायक होता है,
परोपकार की मूरत होता है और प्रेम और दया की सूरत  होता है

मेरे सभी गुरुजनों के चरणों में मेरा शत् शत् नमन।

धन्यवाद ब्लॉगर परिवार
         
                         जय हिंद जय भारत

Tuesday, 5 September 2017

Teachers' Day Special Blog

🌺🍀🌺🍀🌺🍀🌺
*निवर्तयत्यन्यजनं   -   प्रमादतः*
*स्वयं  च  निष्पापपथे  प्रवर्तते ।*
*गुणाति तत्त्वं हितमिच्छुरंगिनाम्*
*शिवार्थिनां यः स गुरु र्निगद्यते ॥*

*भावार्थ👉*
                 *जो दूसरों को प्रमाद करने से रोकते हैं, स्वयं निष्पाप रास्ते से चलते हैं, हित और कल्याण की कामना रखनेवाले को तत्त्वबोध कराते हैं, उन्हें गुरु कहते हैं । शिक्षक दिवस पर सभी गुरूजनों को शत शत प्रणाम व आपको परिवार ,सगे सम्बधियों तथा मित्रमंडली सहित शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

🌺
*ज्ञानतिमिरान्धस्य*
     *ज्ञानाञ्जनशलाकया ।*
*चक्षुरुन्मीलितं येन*
     *तस्मै  श्रीगुरवे  नम : ॥*
*अर्थात्👉*
उस महान गुरु को अभिवादन, जिसने अज्ञान के अंधकार से अंधी हुई आँखों को ज्ञान की काजल-तीली से खोल दिया।
सच में,  एक सच्चे शिक्षक की महानता का शब्दों में वर्णन संभव नहीं है। शिक्षक के संदर्भ में चाणक्य द्वारा कहे गए शब्द निम्न प्रकार प्रस्तुत हैं-
एक योद्धा युद्ध जीतकर दिखा सकता है, किंतु एक शिक्षक साधारण जन को युद्ध जीतने के योग्य बना सकता है। युद्ध को जीतने के लिए चुनौती अच्छे योद्धाओं को ढूंढने में नहीं है, चुनौती है साधारण जन को युद्ध का कारण बताकर उन्हें असाधारण बनाना, जो शिक्षक ही कर सकता है। शिक्षक भाग्य निर्माता भी है।वही सिखाता है कि विचारों को वश में रखो तो वाणी बनेगी, वाणी को वश में रखो तो यही तुम्हारा कर्म बनेगी। कर्मों को वश में रखो, तो यही तुम्हारी आदत बनेगी। आदतों को भी वश में रखो तो, यही तुम्हारा चरित्र बनेगा। चरित्र को वश में रखो, यही तुम्हारा भाग्य बनेगा।
एेसा मार्गदर्शन देने का एकाधिकार ईश्वर ने केवल शिक्षक को ही दिया है।
अब हम वह शख्सियत जिनके कारण भारत में शिक्षक दिवस मनाया जाता है, आदरणीय डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कथन को दोहराना चाहूँगा -
सच्चा टीचर वही है, जो हमें हमारे लिए सोचने में मदद करे, वह नहीं, जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंस दे, बल्कि वह जो आने वाले कल की चुनौतियों के लिए छात्र को तैयार करे। शिक्षक की पहचान इस बात से भी है कि वह ताउम्र सीखता रहे, इतना ही नहीं, छात्रों से सीखने में भी परहेज न करे।वहीं उसकी दी गई शिक्षा का परिणाम एक मुक्त रचनात्मक व्यक्ति के रूप में सामने आना चाहिए। एेसा व्यक्ति जो ऐतिहासिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध लड़ सके।इतना ही नहीं यदि शिक्षा ही इस प्रकार से दी जाए तो समाज से अनेक बुराईयों को भी मिटाया जा सकता है।
एक सच्चे शिक्षक और इस ब्लॉग के संकल्पनाधारक श्री मोहित दीक्षित सर को ब्लॉग के समस्त लेखकों द्वारा समर्पित।

Sunday, 3 September 2017

शिक्षक की भूमिका

गुरु शिष्य की परंपरा भारतीय शिक्षा व्यवस्था की नींव रही है। प्राचीन गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था में गुरु शिष्य के संबंध अत्यन्त प्रगाढ़ रहे हैं , परंतु धीरे धीरे इन संबंधों में वो गर्माहट , वो अपनापन कहीं खो गया है । ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका बढ़ जाती हैं । शिक्षक को अपनी भूमिका में एक मित्र , एक मार्गदर्शक , एक प्रेरक , एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करनी चाहिए ।हर विद्यार्थी में अपार संभावनाएं छुपी हुई हैं उन संभावनों को प्रतिभाओ में बदलने का पवित्र कार्य शिक्षक का परम कर्तव्य है।शिक्षक के लिए जरूरी है कि वो अपने विद्यार्थियों में वो आत्मविश्वास जगाये की  वो हर कार्य को करने के लिये तत्पर हो सके। रवींद्र नाथ ठाकुर जी ने शिक्षक की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा भी है कि शिक्षको को अपने विद्यार्थीयो को प्रभावित नही अपितु प्रकाशित करना चाहिए। शिक्षक और विद्यार्थीयो के मध्य का प्रगाढ़ वैश्वासिक संबंध ही शिक्षा को उसके वास्तविक लक्ष्य तक ले जा सकता है।