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Tuesday, 5 September 2017

Teachers' Day Special Blog

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*निवर्तयत्यन्यजनं   -   प्रमादतः*
*स्वयं  च  निष्पापपथे  प्रवर्तते ।*
*गुणाति तत्त्वं हितमिच्छुरंगिनाम्*
*शिवार्थिनां यः स गुरु र्निगद्यते ॥*

*भावार्थ👉*
                 *जो दूसरों को प्रमाद करने से रोकते हैं, स्वयं निष्पाप रास्ते से चलते हैं, हित और कल्याण की कामना रखनेवाले को तत्त्वबोध कराते हैं, उन्हें गुरु कहते हैं । शिक्षक दिवस पर सभी गुरूजनों को शत शत प्रणाम व आपको परिवार ,सगे सम्बधियों तथा मित्रमंडली सहित शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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*ज्ञानतिमिरान्धस्य*
     *ज्ञानाञ्जनशलाकया ।*
*चक्षुरुन्मीलितं येन*
     *तस्मै  श्रीगुरवे  नम : ॥*
*अर्थात्👉*
उस महान गुरु को अभिवादन, जिसने अज्ञान के अंधकार से अंधी हुई आँखों को ज्ञान की काजल-तीली से खोल दिया।
सच में,  एक सच्चे शिक्षक की महानता का शब्दों में वर्णन संभव नहीं है। शिक्षक के संदर्भ में चाणक्य द्वारा कहे गए शब्द निम्न प्रकार प्रस्तुत हैं-
एक योद्धा युद्ध जीतकर दिखा सकता है, किंतु एक शिक्षक साधारण जन को युद्ध जीतने के योग्य बना सकता है। युद्ध को जीतने के लिए चुनौती अच्छे योद्धाओं को ढूंढने में नहीं है, चुनौती है साधारण जन को युद्ध का कारण बताकर उन्हें असाधारण बनाना, जो शिक्षक ही कर सकता है। शिक्षक भाग्य निर्माता भी है।वही सिखाता है कि विचारों को वश में रखो तो वाणी बनेगी, वाणी को वश में रखो तो यही तुम्हारा कर्म बनेगी। कर्मों को वश में रखो, तो यही तुम्हारी आदत बनेगी। आदतों को भी वश में रखो तो, यही तुम्हारा चरित्र बनेगा। चरित्र को वश में रखो, यही तुम्हारा भाग्य बनेगा।
एेसा मार्गदर्शन देने का एकाधिकार ईश्वर ने केवल शिक्षक को ही दिया है।
अब हम वह शख्सियत जिनके कारण भारत में शिक्षक दिवस मनाया जाता है, आदरणीय डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कथन को दोहराना चाहूँगा -
सच्चा टीचर वही है, जो हमें हमारे लिए सोचने में मदद करे, वह नहीं, जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंस दे, बल्कि वह जो आने वाले कल की चुनौतियों के लिए छात्र को तैयार करे। शिक्षक की पहचान इस बात से भी है कि वह ताउम्र सीखता रहे, इतना ही नहीं, छात्रों से सीखने में भी परहेज न करे।वहीं उसकी दी गई शिक्षा का परिणाम एक मुक्त रचनात्मक व्यक्ति के रूप में सामने आना चाहिए। एेसा व्यक्ति जो ऐतिहासिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध लड़ सके।इतना ही नहीं यदि शिक्षा ही इस प्रकार से दी जाए तो समाज से अनेक बुराईयों को भी मिटाया जा सकता है।
एक सच्चे शिक्षक और इस ब्लॉग के संकल्पनाधारक श्री मोहित दीक्षित सर को ब्लॉग के समस्त लेखकों द्वारा समर्पित।