Thursday, 22 August 2019

HIV-AIDS

HIV - AIDS
क्या होता है एचआईवी
 एचआईवी का पूरा नाम ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस होता है यह रेट्रोवायरस श्रेणी का वायरस है।
क्या होता है एड्स
एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम होता है, अर्जित प्रतिरक्षा न्यूनता सिंड्रोम इसका हिंदी नाम है

- एचआईवी वायरस लंबी अवधि शरीर में बने रहने से शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता जिसे विज्ञान की भाषा में प्रतिरक्षा कहा जाता है, कम हो जाती है इस स्थिति को एड्स कहा जाता है।
दरअसल एड्स अपने आप में कोई बीमारी नहीं होकर शरीर में बहुत सारी बीमारियों का एक साथ होना है।

एचआईवी संक्रमण के कारण
इसके 4 कारण होते हैं-
प्रथम-असुरक्षित यौन संबंध बनाने से
द्वितीय-संक्रमित सुई का प्रयोग करने से
तृतीय-एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति का रक्त स्वस्थ व्यक्ति को चढ़ाने से
चतुर्थ-मां के शरीर से अपरा(प्लेसेंटा) के माध्यम से बच्चे के शरीर में

HIV संक्रमण के लक्षण
उल्टी आना,शरीर पर चकत्ते होना ,कमजोरीमहसूस होना,सिर दर्द रहना इत्यादि

एचआईवी एकमात्र ऐसा संक्रमण है जो तभी फैलता है जब आप इसे चाहते हैं अर्थात् यदि हम जागरूक बने तो हम इस से बच सकते हैं क्योंकि यह हवा ,पानी, संपर्क से नहीं फैलता है।
इसलिए जागरूकता ही एचआईवी एड्स का इलाज है।

एचआईवी पॉजिटिव व्यक्तियों के लिए हेल्पलाइन नंबर 1097 टोल फ्री नंबर है जोकि उनको इस बारे में संबंधित प्रश्नों के जवाब देने का कार्य करता है।
और तो और इसमें संबंधित व्यक्ति की जानकारी भी गुप्त रखी जाती है।


एचआईवी पर इतना बवाल क्यों
दरअसल एचआईवी एड्स एक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दा था जिसे आज सामाजिक मुद्दा बना दिया है और कुछ रूढ़िवादी मानसिकताओं के कारण एचआईवी पीड़ित व्यक्तियों का समाज में जीवन निर्वहन करना मुश्किल हो गया है।
कुछ लोग समाज में अपनी आभासी प्रसिद्धि को बनाए रखने के लिए एचआईवी पॉजिटिव व्यक्तियों का इलाज न करवाने में ही अपना सौभाग्य समझते हैं जो कि मानवता पर खतरे की घंटी बजा रहा है।
इसके अलावा समाज के तथाकथित समझदार लोग इस मुद्दे पर बात तक करने से कतराते हैं उन्हें लगता है कि यदि ऐसे मुद्दों पर चर्चा होने लग गई जो परिवार का माहौल बिगड़ जाएगा दरअसल आप ही सोचे किसी की जिंदगी ज्यादा महत्वपूर्ण है या आभासी सम्मान
एचआईवी एड्स एक कलंक है जिसको समाज पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित करता जा रहा है तथा उसे हटाने का कोई नाम ही नहीं
हो सकता है कुछ नया सोचने की, नया करने की जरूरत है जागो भारत जागो,जागो युवा जागो
Join Red ribbon class to help HIV positive persons (my experiences after attending a national level meeting of  national AIDS control organisationin in Delhi on20 अगस्त 2019)

जय हिंद जय भारत जय भारतीय वीर  जय भारतीय सेना

Friday, 26 July 2019

वीरता, शौर्य, बलिदान और देशभक्ति की प्रतिमान भारतीय सेना के बारे में कविता

  नमस्कार ब्लॉगर परिवार
कारगिल विजय दिवस के 20 वर्ष पूर्ण होने पर भारतीय वीरों की वीरता को सलाम और ऐसे वीरों को जन्म देने वाली मातृभूमि और उनके माता-पिताओं को प्रणाम

 इस अवसर पर मैं मां भारती के सभी सपूतों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं

  आज भारतीय सेना के लिए कुछ स्वरचित पंक्तियां प्रस्तुत है-



ना प्रसिद्धि की  मृगतृष्णा है,ना भौतिकवादिता से लेना देना हैं
स्वतंत्रता की सच्ची प्रहरी भारतीय सेना हैं
एक बार निकल जो पड़े तो फिर आपको कौन रोकता है
आपके खून के उबाल को हर मौसम सलाम ठोकता है
भारतीयों को सुख की नींद सुलाने के लिए आप सदा-सदा सो जाते हो
मातृभूमि की रक्षा के लिए असीम संसार में खो जाते हो,
आसान नहीं है राह आपकी कदम कदम पर शूल है
तिरंगा ना झुके इसके लिए प्राणों की बाजी भी आपको क़ुबूल है
पता नहीं कब रक्षा का बंधन टूट जाए
पता नहीं कब उस साहसी महिला का चूड़ा फूट जाए
हमला एक हुआ तो मां-बाप की सांसे रुक जाती हैं
लेकिन अमर हो जाते हो आप और सम्मान में सारी जनता झुक जाती है
कभी गीत हो आप,कभी वंदन बन जाते हो
कभी वीर हो आप तो कभी अभिनंदन बन जाते हो
काश हर भारतीय में आप जैसा खून बहे
काश हर युवा में मातृभूमि सेवा का आप जैसा जुनून रहे
तो फिर क्या दम है कुछ दानवों की जो पुलवामा जैसा नरसंहार करें
घर में गद्दार ना हो तो भेड़ियों की क्या औकात जो सोए शेरों पर वार करे
'भारतीय' आप की जाति है और 'मानवता' धर्म है
वतन आबाद रहे यही प्रयत्न आपका कर्म है

जय हिंद जय भारत जय भारतीय वीर जय भारतीय सेना

धन्यवाद ब्लॉगर परिवार

Tuesday, 21 May 2019

Concept,types,definitions,importance of evaluation in education,#Evaluation


स्वागत है ब्लॉगर परिवार


                      मूल्यांकन  (EVALUATION)

Evaluation is the comprehensive and continuous process , which  find outs about
the knowledge of student related to any subject or  given content .
Mainly the process of evaluation is based on the educational and instructional objectives because the examiner or e‌valuator tests the students according to the objectives which were decided in the beginning  of session or learning process.
Evaluation has more importance than measurement and assessment because measurement gives  only quantitative results or numerical results about student there is lack of information about life ethics, personality, attitude towards co-curricular activities and strength of student .

so we can say that measurement is not the basis on which a concluding statement is given about the student.

NEED OF EVALUATION

1-Evaluation is required to give information   to the parents about the the condition of student in learning .

2-Evaluation gives feedback  teacher so that he or she can improve his or her teaching methods and communication skills.

3-Evaluation gives feedback to student also the student will be able to get help in their studies in future.

4-Evaluation is the backbone of teaching learning process because it tells us how many  objectives are completed by the student or learner.


THE PROCESS OF EVALUATION

1-EXAMINATION
In this step the  evaluator tests student through question papers and oral test based on the content and related with educational objectives .

2-DIAGNOSIS-
In this step  the evaluator consults with student on his or her result of examination because the evaluator wants to know that what were the reasons due to which the student failed in getting complete his or her educational objectives.

3-REMEDIES
In this step the teacher or evaluator teaches again students according to their requirement these classes are called remedial classes and this teaching is called remedial teaching
In the end of evaluation process the evaluator takes test again which is called remedial test or examination
Evaluator tries  to observe the  personality of student and  gives  a statement about student's character.

धन्यवाद ब्लॉगर परिवार
       

      जय हिंद  जय भारत जय मां भारती जय भारतीय सेना









Sunday, 12 May 2019

सच्चे प्रेम की प्रतिमूर्ति मां के बारे में कविता, मां की ममता

नमस्कार ब्लॉगर परिवार
 विश्व मातृत्व दिवस पर मां के लिए मेरी कुछ पंक्तियां अग्र अनुसार प्रस्तुत हैं-

मां से ही हम सब का संसार शुरू होता है
गुरु होती है मां और मां का स्थान गुरु होता है
अमरबेल(दूसरों पर आश्रित)से वृक्ष बना देती है मां
नौसिखिया को दक्ष बना देती है मां
आज तक तूने की कोई मनमानी नहीं
सच्चे प्रेम में मां तेरा कोई सानी नहीं
तेरी महिमा का बखान करूं तो इतने पेज कहां है
तुझसे बड़ा बन सकू इतना तेज(साहस) कहां है 
संतान के आंसू बचाने के लिए मां  आंसुओं का घूंट पी लेती है
उनकी (संतान) नींद के लिए मां बिना नींद जी लेती है
बचपन में सूखे में सुलाती है हमें और गीले में उसे सोना पड़ता है
दुर्भाग्य है इस देश का जो कभी बेटे के लिए रोने वाली मां को बुढ़ापे में बेटे की वजह से रोना पड़ता है
तेरे आंचल सा  सुनहरा उपवन कहां है
मां बिन मेरा अस्तित्व कहां है
लाख-लाख वेदनाएं मां तुझको सहनी पड़ती है
संतान की जिंदगी सफल बनाने के लिए तुझे अपनी जिंदगी की आहुति देनी पड़ती है


धन्यवाद
ब्लॉगर परिवार


Sunday, 14 April 2019

जलियांवाला बाग हत्याकांड में शहीद हुए वीर वीरांगनाओं को श्रद्धांजलि कविता

नमस्कार ब्लॉगर परिवार
🇮🇳🇮🇳🇮🇳13 अप्रैल 1919 को ब्रिटिश सरकार द्वारा अंजाम दिए गए एक घृणित कृत्य जलियांवाला बाग हत्याकांड की 100वीं बरसी पर  मैं भारत मां के सभी शहीद वीर और वीरांगनाओं को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं इस हत्याकांड के संदर्भ में  मेरी कुछ मौलिक पंक्तियां इस प्रकार  प्रस्तुत है-

इतिहास कहता है कि वार शनिवार था
सुना तो यूं भी जाता है कि बैसाखी का त्यौहार था
नहीं थे तैयार भारतीय रॉलेट एक्ट को सहने को
सो हो गए इकट्ठे मन की बातें कहने को
उस काले दिन हजारों भगत सिंह, सुभाष और गांधी मारे गए
निहत्थे निर्दोष मौत के घाट उतारे गए
अंग्रेजी हुकूमत स्वतंत्रता संग्राम पर गहरी चोट देना चाहता था
या यूं कहो कि आजादी की हुंकार का गला घोट देना चाहता था 
दिया आदेश सेना को उस जालिम जनरल डायर ने
तबाही मचा दी उस भेडिए कायर ने
एक तरफ कुआं था तो दूसरी तरफ खाई थी
उस भेड़िए की वजह से शांत शेरों की कयामत आई थी
गुरुदेव ने फिर नाइटहुड छोड़ दिया
इस घृणित कृत्य ने विरोध की दहकती ज्वाला को नया मोड़ दिया
ऊधम सिंह से वीर ने कसम माँ भारती की खायी थी
फिर उस हत्यारे को कैक्सटन हॉल में मौत की राह पकड़ाई थी
महसूस करो इतिहास की उन करुणामयी चित्कारों को
नमन करो भारत माँ के उन प्यारों को, भारत मांँ के उन प्यारों को
शांति और चैन पर मैं अमन करता हूँ
सौ वर्ष बीत गए उस मौन शहादत को मैं राजेन्द्र शत् शत् नमन  करता हूँ
नमन करता हूँ शहादत की संध्या आरती को
नमन भारतीय वीर- वीरांगनाओं को और नमन मां भारती को
     
       🇮🇳🇮🇳जय हिंद जय भारत जय भारतीय शहीद🇮🇳🇮🇳

धन्यवाद ब्लॉगर की दुनिया

Sunday, 17 February 2019

पुलवामा हमला एक काला दिन(The pulwama attack:a black day)




14 फरवरी 2019 का दिन भारतीय सेना लिए एक काली और भयावह रात जैसा था जिसमें कायर लोगों ने दुष्टता और नीचता पूर्वक कुटिलता का सहारा लेते हुए कुछ राज खोलने वालों की मदद से भारतीय सेना के 44 जवानों को छीन लिया
आतंक का यह राक्षस निरंतर बढ़ता ही जा रहा है जो हमारे जाने पर पीछे से वार करके अपनी दुष्टता का परिचय दे रहा है भारत मां के ये जवान सदा सदा अमर रहेंगे और युवाओं के लिए प्रेरणा  स्रोत रहेंगे उन  जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए आतंकवाद पर मेरी कुछ पंक्तियां प्रस्तुत है

ले गए बलिदान हत्यारे मांँ भारती के 44 सपूतों का
जरूर होगा हाथ इसमें कुछ देशद्रोही दूतों का
बिजली सी चाल से वे जिंदगी की दौड़ को दौड़ गए
एक बार फिर से हमारे 44 भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु हमें छोड़ गए
जिन जवानों को हम हीरों के रूप में देखते हैं
उन्हीं जवानों पर कुछ दुष्ट पत्थर फेंकते हैं
राह बताते हैं कुछ लोग उन आताताईयों को
पनाह देते हैं घरों में उन सौतेले भाइयों को
कब तक हम बलिदान यह सहते रहेंगे?
कब तक हम अबकी बार अबकी बार कहते रहेंगे?
लड़ते तो हमारे 44 उनके 444 को नहीं छोड़ते
देह छोड़ देते लेकिन मांँ भारती की सेवा से मुंँह नहीं मोड़ते
फूट  दिखती है उन्हें इसीलिए तो भारत में आते हैं
कुछ बड़बोले तो इस शहादत पर भी राजनीति करने लग जाते हैं
वे (आतंकी) सबसे कायर हैं दुनिया में यही बताना चाहते हैं
हमारे मणियों की माला बिखेरकर वे कौन सा वीरता पुरस्कार पाते हैं
माना कि हम सीमा पर जाकर लड़ नहीं सकते
लेकिन रोज अखबारों में बेगुनाह जवानों की शहादत की खबरें भी हम पढ़ नहीं सकते
 माना कि हमारी सहनशीलता का सम्मान पिट जाएगा
लेकिन हम मिलकर चाहे तो दुनिया के नक्शे से आतंक का नामोनिशान मिट जाएगा



Saturday, 9 February 2019

भारतीय समाज और असहिष्णुता?


असहिष्णुता ?

नमस्कार मित्रों।
          
                  एक बार आपका फिर से मेरे ब्लॉग में स्वागत है। पिछले कुछ वर्षों से भारतीय राजनीति को एक नया शब्द मिला है जिसका नाम है :-  असहिष्णुता ? आप सोच रहे होंगे मैं बार बार असहिष्णुता? के पीछे प्रश्नवाचक चिह्न क्यों  लगा रहा हूँ ? चिंता मत कीजिए मेरे ब्लोग पढ़ते रहिये आपके सभी सवालों का जबाब मेरे ब्लॉग मेंं है।

तो आनंदित होने के लिए तैयार हो जाइए 😊
                 भारत में सरकार परिवर्तन के साथ ही  सहिष्णुता वनाम असहिष्णुता की जंग छिड़ गई  तथा इसी के साथ भारत दो गुटों में बंट गया एक तबका जो भारत को  सहिष्णु मानता हैं तथा दूसरा तबका जो भारत को असहिष्णु  मानता है। 

सहिष्णु शब्द  का शाब्दिक अर्थ होता हैै  सहन करना और इसी के विलोम में असहिष्णु शब्द का अर्थ होता हैै सहन ना कर पाना । 

परंतु भारतीय राजनीति में इसका उपयोग धार्मिक आधार पर किया जाता है। असहिष्णुता के समर्थकों का मानना है कि भारत में धर्म के नाम पर असहिष्णुता बढ़ रही है लोग धर्म के नाम पर लोग एक दूसरे को मार रहे हैं और धर्म में भी खासकर हिन्दू धर्म को इंगित करके असहिष्णुता का धब्बा लगाया  जा रहा है इन लोगो का मानना की सम्पूर्ण  हिन्दू समाज असहिष्णु हो गया है और धर्म के नाम पर अल्पसंख्यक धर्म के लोगो की हत्या कर रहा है और इसके चलते कई कलाकारों  जिन्हें ना केवल अल्पसंख्यक समाज द्वारा ही नही  सम्पूर्ण भारत एवं हिन्दू  समाज द्वारा भी बहुत सम्मान दिया  गया है और अब भी दिया जा रहा है  को भारत में रहने से डर लगने लगा है। इन कलाकारों की राजनीतिक 
प्रत्याशाओं को डर का रूप देने की कला को मेरा सलाम।

सर्वप्रथम आमिर खान ने कहा की भारत में माहौल अच्छा नही है और उन्हें भारत में डर लगता है और उनकी पत्नी उन्हें कहती है कि हमें भारत को छोड़ देना चाहिए।
और हाल ही में नाशीरुद्दीन शाह का बयान आया कि उन्हें भारत में डर लगता है की कही कोई उनके बच्चों को रास्ते में मार ना दे और भारत में इंसान की जान से ज्यादा गाय की जान की ज्यादा कीमत है।

और इसके चलते कई साहित्कारों ने अपने सम्मान लौटा दिए।

पर इन सब पर सवाल यह उठतें है कि :-

1. पिछले पांच सालों में ऐसा क्या हो गया जो आज तक देश में कभी नहीं हुआ तो फिर अचानक देश में असहिष्णुता कहा से आ गई।

2. अखलाल और कलबुर्गी की मौत पर अपने पुरुष्कार बापसी करने वाले साहित्यकार तब कहा थे जब 5 लाख कश्मीरी पंडितों को उनके घर से निकाल दिया गया तथा पूरे देश में 10,000 सिक्खों को मार दिया गया तब किसी भी साहित्यकार के आंखों में आंसू नहीं आये। तो अचानक ऐसा क्या हो गया जो पूरा भारतीय समाज असहिष्णु हो गया।

3. मुंबई बम धमाकों में इतने लोग मारे गए तब कलाकारों को डर नही लगा।

4. रोहिंग्या मुसलमानो को बापिस ना भेजा जाए इसलिए आजाद मैदान में तोड़ फोड़ कि गई कई पॉलिस कर्मियों को मार  दिया गया तब डर नहीं लगा तो अचानक ऐसा क्या हो गया......

और यदि देश में हिंसा के आंकड़ों को देखा जाए तो साल दर साल हिंसा के आंकड़े कम होते जा रहे हैं।

Ipsos mori नामक एक संस्था ने 27 देश एवं 20,000 लोगो का सर्वे किया गया जिसके आधार पर कनाडा , चीन  और मलेशिया के बाद भारत का सहिष्णु देशो में चौथा स्थान  आता हैं। 


और अब हिन्दू समाज में सहिष्णुता की बात करें तो:- 

इतिहास से आरंभ करे तो 17-17 बार मोहम्मद गौरी को पृथ्वीराज चौहान ने माफ किआ था .. इससे ज्यादा कोई क्या सहिष्णु हो सकता है।
14-14 बार महमूद गजनवी ने  सोमनाथ मंदिर को तोड़ा था फिर भी मंदिर के पुजारी ने उससे कुछ नही कहा।

और यदि वर्तमान की बात करे तो राजनीति के अलावा कही भी असहिष्णुता नही है......

यदि मैं मेरे खुद के परिवार की बात करूँ तो अब भी मेरे घर पर पहली और आखिरी रोटी पशु के लिए बनती है जिससे जीव मात्र तक भूखा ना रहे।

आज भी शाम होने के बाद हम पेड़ पौधों को हाथ नही लगाते यह मानते हुए की इनमे भी इंसानो की तरह जान है और यह सो रहे होते हैं

अभी भी भारत में गांवो में लोग मिल जुलकर रहते हैं।

जिस प्रकार किसी एक व्यक्ति के बुरे कार्यो की वजह से पूरे परिवार को बुरा नही कह सकते उसी प्रकार कुछ लोगो के गलत इरादों की वजह से पूरे भारतीय समाज एवं हिन्दू धर्म को बुरा , असहिष्णु या निकृष्ट धर्म नही कह सकते ।

भारत एक है इसे एक रहने दो धर्म के आधार पर या अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं  की पूर्ति के लिए इसे मत बांटो ।

भारत देश जो अपनी अहिंसा और सत्य के लिए विश्व भर में विख्यात है.......आज इस निकृष्ट राजनीति से जूझ रहा हैं।

भारत एक सहिष्णु एवं सर्वधर्मसमभाव वाला देश है।

धन्यवाद।

आनंदित भव: 😊