Monday, 28 January 2019

नेपोलियन के बुलंद होसलों की कहानी- A MOTIVATIONAL STORY



नेपोलियन अक्सर जोखिम (risky) भरे काम किया करते थे। एक बार उन्होने आलपास पर्वत को पार करने का ऐलान किया और अपनी सेना के साथ चल पढे। सामने एक विशाल और गगनचुम्बी पहाड़ खड़ा था जिसपर चढ़ाई करने असंभव था। उसकी सेना मे अचानक हलचल की स्थिति पैदा हो गई। फिर भी उसने अपनी सेना को चढ़ाई का आदेश दिया। पास मे ही एक बुजुर्ग औरत खड़ी थी। उसने जैसे ही यह सुना वो उसके पास आकर बोले की क्यो मरना चाहते हो। यहा जितने भी लोग आये है वो मुह की खाकर यही रहे गये। अगर अपनी ज़िंदगी से प्यार है तो वापिस चले जाओ। उस औरत की यह बात सुनकर नेपोलियन नाराज़ होने की बजाये प्रेरित हो गया और झट से हीरो का हार उतारकर उस बुजुर्ग महिला को पहना दिया और फिर बोले; आपने मेरा उत्साह दोगुना कर दिया और मुझे प्रेरित किया है। लेकिन अगर मै जिंदा बचा तो आप मेरी जय-जयकार करना।
उस औरत ने नेपोलियन की बात सुनकर कहा- तुम पहले इंसान हो जो मेरी बात सुनकर हताश और निराश नहीं हुए। ‘ जो करने या मरने ‘ और मुसीबतों का सामना करने का इरादा रखते है, वह लोग कभी नही हारते।
आज सचिन तेंदुलकर (sachin tendulkar) को इसलिए क्रिकेट (cricket) का भगवान कहा जाता है क्योकि उन्होने जरूरत के समय ही अपना शानदार खेल दिखाया और भारतीय टीम को मुसीबतों से उभारा। ऐसा नहीं है कि यह मुसीबते हम जैसे लोगो के सामने ही आती है, भगवान राम के सामने भी मुसीबते आयी है। विवाह के बाद, वनवास की मुसीबत। उन्होने सभी मुसीबतों का सामना आदर्श तरीके से किया। तभी वो मर्यादा पुरषोतम कहलाये जाते है। मुसीबते ही हमें आदर्श बनाती है।

अंत मे एक बात हमेशा याद रखिये;
जिंदगी में मुसीबते चाय के कप में जमी मलाई की तरह है,
और कामयाब वो लोग हैं जिन्हे फूँक मार के मलाई को साइड कर चाय पीना आता है।
         जय हिंद, भारत माता की जय

Saturday, 26 January 2019

आंतरिक मूल्यांकन और बाह्य मूल्यांकन का तुलनात्मक परिचय

नमस्कार ब्लॉगर परिवार
Special request:-
कृपया हमारे ब्लॉग पर रोजाना प्रकाशित हो रही अन्य रचनाओं को भी पढें,मैं आपका आभारी हूँ।

आंतरिक मूल्यांकन
1- इसमें मूल्यांकनकर्ता शिक्षण प्रक्रिया से संबंधित व्यक्ति ही होता है।
2- यह अपेक्षाकृत सस्ती प्रक्रिया है।
3- यह छात्र की वास्तविकता से परिचय करवाता है अर्थात् इसकी वैधता अधिक होती है यह संपूर्ण शिक्षण प्रक्रिया से वास्तविक रूप में जुड़ा रहता है।
4- यह छात्रों के पूरे शैक्षिक सत्र में उपस्थिति, उसका निष्पादन ,आचरण, पाठ्यक्रम संबंधी क्रियाकलाप ,रुचि तथा लग्न आदि को ध्यान में रखकर किया जाता है।
5- इसमें पक्षपात व व्यक्तिगत पहचान का भाव निहित होता है।
6- यह वस्तुनिष्ठ की बजाय व्यक्तिनिष्ठ अधिक होता है।
7- यह सतत् तथा व्यापक होता है।
8- यह पूर्व निर्धारित समय सारणी के बिना भी आयोजित किया जा सकता है।

बाह्य मूल्यांकन
1- इस में मूल्यांकनकर्ता   बाहरी व्यक्ति होता है जो शिक्षण प्रक्रिया से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित नहीं होता है।
2- यह अपेक्षाकृत खर्चीली प्रक्रिया है।
3- यह छात्र की वास्तविकता से अपेक्षाकृत कम संबंध रखता है क्योंकि यह एक निश्चित समय अवधि में लिए गए परीक्षण से संबंधित होता है । संपूर्ण शिक्षण प्रक्रिया से इसका संबंध कमजोर जान पड़ता है।
4- यह  निश्चित समय अवधि में कुछेक प्रश्न पत्रों के माध्यम से ली गई परीक्षाओं के द्वारा छात्रों का आकलन करता है।
5- इसमें पक्षपात व व्यक्तिगत पहचान की अपेक्षाकृत  क्षीण संभावना पाई जाती है।
6- इसमें अपेक्षाकृत अधिक वस्तुनिष्ठता निहित होती है।
7- इसमें सतत् व व्यापक होने के गुण का अभाव पाया जाता है।
8- यह पूर्व निर्धारित समय सारणी के अनुसार ही आयोजित किया जाता है।

Friday, 25 January 2019

आधुनिक युग में भारत की प्रमुख चुनौतियां (The challenges for India in modern age)

नमस्कार ब्लागर परिवार

सांप्रदायिकता की आग में वतन यह जल रहा है
भ्रष्टाचार का अंधेरा हाथ यह मल रहा है।
कोई हिंदू की कहता हैं ,कोई मुस्लिम की गाता हैं
सांप्रदायिकता का यह चक्रव्यूह मुझे नहीं भाता है।
कोई सवर्ण कह रहा है, कोई दलित की अलाप रहा हैं
ऊंच-नीच का यह हो कैसा प्रलाप रहा है।
अधिकारियों को लोग चाँदी के जूते मार रहे हैं
माँ भारती पर ये हो कैसे प्रहार रहे हैं।
राजा हो या रंक सबके ध्येय में पैसा है
भाई भाई को मार रहा है यह प्रलोभन कैसा है?
बच्चों को झोंक दिया कारखानों में
काला रंग भर दिया उनके अरमानों में।
मां भारती के प्रति अब वो प्यार नहीं रहा
या यूं कहो कि देश प्रेम का अब वो त्योहार नहीं रहा।
जनसंख्या की वृद्धि में मानों प्रकाश की चाल है
आज माँ भारती के प्रांगण का हाल बेहाल है।
धर्मसंकट का युग आज आ गया है
लगता है फिर से दुर्योधन राज आ गया है।
राजनेता देश की प्रतिष्ठा से जुआ खेल रहे हैं
गरीब बेचारे पापड़ बेल रहे हैं।
राम जैसे  राजा नहीं रहे, हनुमान जैसे कर्मचारी नहीं रहे
राजा विक्रम जैसे  न्यायाधीश  नहीं रहे, भीष्म जैसे ब्रह्मचारी नहीं रहे।
सैनिक बेचारे कश्मीर में ठिठुर रहे हैं
लेकिन हम भारतीय तो आपस में ही लड़कर मर रहे हैं।
फूट डालकर राज करने वाली आज की राजनीति है
यह सब पंक्तियां माँ भारती की आपबीती है।



यह मेरी मौलिक रचना हैं।
धन्यवाद
भवदीय
राजेन्द्र

Monday, 21 January 2019

Mock UNO, शिक्षा के क्षेत्र में एक नया प्रयोग, परिष्कार

नमस्कार ब्लागर परिवार
स्थान-परिष्कार कॉलेज आफ ग्लोबल एक्सीलेंस                   जयपुर,राजस्थान(भारत)
तिथि-21जनवरी 2019
कार्यक्रम का नाम-Mock UNO का आयोजन
आज परिष्कार कॉलेज ऑफ ग्लोबल एक्सीलेंस जयपुर में मॉक यूएनओ का आयोजन किया गया ।यह आयोजन राजनीतिक विज्ञान विभाग परिष्कार कॉलेज की ओर से किया गया। इसमें बी ए प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष के राजनीतिक विज्ञान के छात्रों ने तथा एकीकृत B.Ed प्रथम वर्ष के छात्रों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को यूएनओ की कार्यशैली से परिचित करवाना था। इस कार्यक्रम की में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ राजेश शर्मा जी (राजस्थान विश्वविद्यालय) ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।इस स्वर्णिम कार्यक्रम के अवसर पर परिष्कार कॉलेज के निदेशक डॉ राघव प्रकाश जी ने विद्यार्थियों से अपील की कि वह अपने आप को किसी गांव राज्य या भारत का नागरिक न मानकर अपने अंदर विश्व नागरिकता का विकास करें ।क्योंकि प्राचीन भारतीय संस्कृति का  वक्तव्य है "वसुधैव कुटुंबकम"  अर्था थे संपूर्ण पृथ्वी ही हमारा परिवार है ।उसमें न केवल मानव अपितु संपूर्ण प्राणी जीवन और वनस्पति जगत शामिल है ।इस कार्यक्रम में परिष्कार कॉलेज के छात्रों ने  लगभग 60 विभिन्न देशों का प्रतिनिधित्व करके वर्तमान में अपना कहर बरपा रही निम्न  पर्यावरणीय समस्याओं पर चर्चा की-
1- मरुस्थलीकरण
2- हरित गृह प्रभाव
3- संकटग्रस्त प्रजातियाँ
4- शस्त्रीकरण
5- समुद्री जल प्रदूषण
6-  वनों की कटाई
7- ओजोन क्षय
8- जैव विविधता
9- अम्लीय वर्षा
10- ग्लेशियरों का पिघलना
11- पेयजल समस्या
12- वैश्विक उष्णन
13- कृषि में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग

 इन समस्याओं पर विद्यार्थियों द्वारा वैश्विक दृष्टिकोण से चर्चा की गई ।तथा मैंने इस चर्चा के माध्यम से इन समस्याओं के निदान के बारे में जो कुछ निष्कर्ष निकाला वह निम्न प्रकार है-

पर्यावरणीय समस्याएं एक वैश्विक मुद्दा है जिनके लिए न केवल एक विशिष्ट राष्ट्र या समाज का विशिष्ट तबका जिम्मेवार है अपितु इनके लिए संपूर्ण मानवीय समुदाय जिम्मेवार है ।पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान विभिन्न राष्ट्रों द्वारा एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप द्वारा कदापि संभव नहीं हो सकता । इसके लिए सभी को अपनी भूमिका का कर्तव्यनिष्ठता
 पूर्वक  निर्वहन करना होगा पर्यावरणीय समस्याओं का शीघ्र अतिशीघ्र समाधान निकालना अत्यावश्यक है। अन्यथा मानवता काल के गाल में समा सकती है। हमको पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए एकीकृत मिशन भाव से काम करना होगा क्योंकि कभी भी अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता है ।लेकिन एक व्यक्ति जो दूसरों से करवाना चाहता है उसकी शुरुआत वह खुद करें यह कहीं अधिक उपयुक्त वक्तव्य हैं।इनके समाधान के लिए विश्वस्तरीय  कार्यक्रम चलाए जावे तथा समूचा विश्व पृथ्वी को सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हो



एक विद्यार्थी के रूप में इस कार्यक्रम में भाग लेकर मैं अपने आप को गौरवान्वित महसूस करता हूं ऐसे कार्यक्रम विश्वविद्यालय स्तर पर व्यापक रूप से चलाए जाने चाहिए इससे शिक्षा का सार्वभौमीकरण होता है तथा विद्यार्थी किताबी ज्ञान को अपनी वास्तविक जिंदगी से जोड़ पाने में संभव होते हैं वास्तव में यह परिष्कार कॉलेज का सराहनीय प्रयास है

धन्यवाद
भवदीय
राजेन्द्र




Sunday, 20 January 2019

कभी तो सोच के देखो। Motivational Story

www.anilvishnoisanchorebloggerstory.in

एक व्यक्ति का घर शहर से दूर एक छोटे से गाँव में था। उसके घर में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं थी। लेकिन फिर भी वो खुश नहीं रहता था। उसे लगता था की शहर की जिंदगी अच्छी है। इसलिए एक दिन उसने गाँव के घर को बेचकर शहर में घर लेने का फैसला किया। अगले ही दिन उसने शहर से अपने दोस्तों को बुलाया। जो रियल स्टेट में काम करता था।


उसने अपने दोस्त  से कहा – तुम मेरा ये गाँव का घर बिकवा दो, और मुझे शहर में एक अच्छा सा घर दिलवा दो। उसके दोस्त ने घर को देखा और कहा – तुम्हारा घर इतना सुन्दर है। तुम इसे क्यों बेचना चाहते हो। अगर तुम्हे पैसों की जरुरत है तो मैं तुम्हे कुछ पैसे से सकता हूँ। उस व्यक्ति ने कहा – नहीं नहीं मुझे पैसों की जरुरत नहीं है।
मैं इस घर को इसलिए बेचना चाहता हूँ। क्योकि ये घर गाँव से बहुत दूर है। यहां पर शहर की तरह पक्की सड़के भी नहीं है। यहाँ के रास्ते बहुत ही ऊबड़ खाबड़ है। यहाँ पर बहुत सारे पेड़ पौधे है। जब हवा चलती है तो पुरे घर में पत्ते फैल जाते है। ये गाँव पहाड़ो से घिरा हुआ है। अब तुम ही बताओ मैं शहर क्यों न जाऊ।
उसके दोस्त ने कहा – ठीक है। अगर तूने शहर जाने का सोच ही लिया है। तो में जल्दी ही तुम्हारे इस घर को बिकवा दूँगा। अगले ही दिन सुबह के समय वह व्यक्ति अखबार पढ़ रहा था। उसने अखबार में एक घर का विज्ञापन देखा। विज्ञापन में लिखा था।
शहर की भीड़ भाड़ से दूर, पहाड़ियों से घिरा हुआ, हरियाली से भरा हुआ, ताजी हवा युक्त एक सूंदर घर में बसाये अपने सपनो का घर। घर खरीदने के लिए निचे दिए गए नंबर पर संपर्क करे। उस व्यक्ति को विज्ञापन देखते ही घर पसंद आ गया। उसने उस घर को खरीदने का मन बनाया।
उसने जब उस नंबर पर फोन किया तो वो हैरान रह गया। क्योकि ये विज्ञापन उसी के घर का था। यह जानकार वह ख़ुशी से झूम उठा। उसने अपने दोस्त को फोन लगाया और कहा – मैं तो पहले से ही अपने पसंद के घर में रह रहा हूँ। इसलिए तुम मेरा घर किसी को मत बेचना। में यही रहुँगा

Moral--- दोस्तों इस Motivational Story से मैं आपको ये समझाना चाहता हूँ। की अधिकतर लोगों को अपने जीवन से शिकायत होती है। वे सोचते है की उनके जीवन में दुःख ही दुःख भरे पड़े है। ऐसे लोगों को दूसरे लोगों की जिंदगी बहुत ही अच्छी लगती है। लेकिन आप ऐसा कभी भी मत करना। कुछ भी करने से पहले एक बार अपनी जिंदगी को दोस्तो की नजरों से जरूर देखना। अगर आपने कभी भी अपनी जिंदगी को दूसरों की नजरों से देखा तो आप पाएंगे की आपकी जिंदगी दूसरों से बहुत ही अच्छी है। (कभी तो सोच के देखो। 

मैं आपका अपना अनिल बैनीवाल साँचोर

Friday, 18 January 2019

Motivational Quotes

हर छोटा बदलाव बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है।

बेरोजगारों की भीड़ वर्तमान भारतीय शिक्षा प्रणाली समस्याएं और कमियां

 नमस्कार 
   Blogger की दुनिया का अभिनंदन करता हूँ।

21वीं सदी में भले ही हम अपनी वैज्ञानिक प्रगति का हवाला देकर अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हों लेकिन आज की भारतीय शिक्षा प्रणाली हमारे इस द्वम्भ प्रदर्शन की झूठी शान पर प्रश्न चिह्न लगाती है ।
आज की भारतीय शिक्षा प्रणाली शिक्षित बेरोजगार तैयार कर रही है। नैतिक शिक्षा की शिक्षा का तो माना आज की भारतीय  शिक्षा से नाता ही नहीं है।आज देश में ऊँचे पदों पर आसीन अफसर भी रिश्वत प्रेमी बन चुके हैं।यह दर्शाता है कि शिक्षा प्रणाली की जड़ें अवश्य ही असुरक्षित हैं। तभी तो आज की भारतीय शिक्षा प्रणाली का यह वृक्ष प्रतिस्पर्धा की आँधी  को झेलने में असमर्थ है।
आज के विद्यार्थी विषयवस्तु की केवल सैद्धांतिक समझ ही रखते हैं बाकी प्रायोगिक परीक्षाओं से उनका नाता अपेक्षाकृत कमजोर जान पड़ता है।
आज की शिक्षा प्रणाली प्रमाण पत्र प्राप्त करने का साधन मात्र बनकर रह गई है। आज की भारतीय शिक्षा प्रणाली का गंतव्य सरकारी नौकरी प्राप्त करने का साधन मात्र बनकर रह गया है। आज भारत के शिक्षित युवक भी बेरोजगारों की भेड़चाल में शामिल होकर खाक छानते फिरते हैं।
वे अपराधियों की पंक्ति में खड़े होकर एक दूसरे की टाँग खींचते हैं।

भारतीय शिक्षा प्रणाली की कमियाँ
1-भारत में शिक्षा विभाग तो हैं लेकिन वे सिर्फ परीक्षाओं के आयोजन पर ही ध्यान देते हैं। समय समय पर शिक्षा का विश्लेषण नहीं किया जाता है।

2-जब पाठ्यक्रम का निर्माण किया जाता है तो इसमें कुछ चुनिंदा लोग ही शामिल होते हैं। यहाँ तक कि देशभर में शिक्षा के संवाहकों का काम करने वाले शिक्षकों को भी पाठ्यक्रम निर्माण में शामिल मुश्किल से ही किया जाता है।

3-हमारा पाठ्यक्रम शिक्षा के सैद्धांतिक पक्ष पर प्रायोगिक पक्ष की अपेक्षा अधिक प्रकाश डालता है।

4-हमारे अधिकांश शिक्षक विशेषतः राजकीय शिक्षण संस्थानों के शिक्षक अपनी भूमिका का निर्वहन कर्तव्यनिष्ठता पूर्वक नहीं करते।

5-शिक्षा को व्यावसायिक रूप दे दिया गया है।

    Blogger की दुनिया का धन्यवाद
     
     जय हिन्द जय भारत