नमस्कार ब्लॉगर परिवार
Special request:-
कृपया हमारे ब्लॉग पर रोजाना प्रकाशित हो रही अन्य रचनाओं को भी पढें,मैं आपका आभारी हूँ।
आंतरिक मूल्यांकन
1- इसमें मूल्यांकनकर्ता शिक्षण प्रक्रिया से संबंधित व्यक्ति ही होता है।
2- यह अपेक्षाकृत सस्ती प्रक्रिया है।
3- यह छात्र की वास्तविकता से परिचय करवाता है अर्थात् इसकी वैधता अधिक होती है यह संपूर्ण शिक्षण प्रक्रिया से वास्तविक रूप में जुड़ा रहता है।
4- यह छात्रों के पूरे शैक्षिक सत्र में उपस्थिति, उसका निष्पादन ,आचरण, पाठ्यक्रम संबंधी क्रियाकलाप ,रुचि तथा लग्न आदि को ध्यान में रखकर किया जाता है।
5- इसमें पक्षपात व व्यक्तिगत पहचान का भाव निहित होता है।
6- यह वस्तुनिष्ठ की बजाय व्यक्तिनिष्ठ अधिक होता है।
7- यह सतत् तथा व्यापक होता है।
8- यह पूर्व निर्धारित समय सारणी के बिना भी आयोजित किया जा सकता है।
बाह्य मूल्यांकन
1- इस में मूल्यांकनकर्ता बाहरी व्यक्ति होता है जो शिक्षण प्रक्रिया से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित नहीं होता है।
2- यह अपेक्षाकृत खर्चीली प्रक्रिया है।
3- यह छात्र की वास्तविकता से अपेक्षाकृत कम संबंध रखता है क्योंकि यह एक निश्चित समय अवधि में लिए गए परीक्षण से संबंधित होता है । संपूर्ण शिक्षण प्रक्रिया से इसका संबंध कमजोर जान पड़ता है।
4- यह निश्चित समय अवधि में कुछेक प्रश्न पत्रों के माध्यम से ली गई परीक्षाओं के द्वारा छात्रों का आकलन करता है।
5- इसमें पक्षपात व व्यक्तिगत पहचान की अपेक्षाकृत क्षीण संभावना पाई जाती है।
6- इसमें अपेक्षाकृत अधिक वस्तुनिष्ठता निहित होती है।
7- इसमें सतत् व व्यापक होने के गुण का अभाव पाया जाता है।
8- यह पूर्व निर्धारित समय सारणी के अनुसार ही आयोजित किया जाता है।
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आंतरिक मूल्यांकन
1- इसमें मूल्यांकनकर्ता शिक्षण प्रक्रिया से संबंधित व्यक्ति ही होता है।
2- यह अपेक्षाकृत सस्ती प्रक्रिया है।
3- यह छात्र की वास्तविकता से परिचय करवाता है अर्थात् इसकी वैधता अधिक होती है यह संपूर्ण शिक्षण प्रक्रिया से वास्तविक रूप में जुड़ा रहता है।
4- यह छात्रों के पूरे शैक्षिक सत्र में उपस्थिति, उसका निष्पादन ,आचरण, पाठ्यक्रम संबंधी क्रियाकलाप ,रुचि तथा लग्न आदि को ध्यान में रखकर किया जाता है।
5- इसमें पक्षपात व व्यक्तिगत पहचान का भाव निहित होता है।
6- यह वस्तुनिष्ठ की बजाय व्यक्तिनिष्ठ अधिक होता है।
7- यह सतत् तथा व्यापक होता है।
8- यह पूर्व निर्धारित समय सारणी के बिना भी आयोजित किया जा सकता है।
बाह्य मूल्यांकन
1- इस में मूल्यांकनकर्ता बाहरी व्यक्ति होता है जो शिक्षण प्रक्रिया से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित नहीं होता है।
2- यह अपेक्षाकृत खर्चीली प्रक्रिया है।
3- यह छात्र की वास्तविकता से अपेक्षाकृत कम संबंध रखता है क्योंकि यह एक निश्चित समय अवधि में लिए गए परीक्षण से संबंधित होता है । संपूर्ण शिक्षण प्रक्रिया से इसका संबंध कमजोर जान पड़ता है।
4- यह निश्चित समय अवधि में कुछेक प्रश्न पत्रों के माध्यम से ली गई परीक्षाओं के द्वारा छात्रों का आकलन करता है।
5- इसमें पक्षपात व व्यक्तिगत पहचान की अपेक्षाकृत क्षीण संभावना पाई जाती है।
6- इसमें अपेक्षाकृत अधिक वस्तुनिष्ठता निहित होती है।
7- इसमें सतत् व व्यापक होने के गुण का अभाव पाया जाता है।
8- यह पूर्व निर्धारित समय सारणी के अनुसार ही आयोजित किया जाता है।