Wednesday, 29 January 2020

जय हिंद की सेना

                        "कोर्ट मार्शल"                   


आर्मी कोर्ट रूम में आज एक
केस अनोखा अड़ा था
छाती तान अफसरों के आगे
फौजी बलवान खड़ा था

बिन हुक्म बलवान तूने ये
कदम कैसे उठा लिया
किससे पूछ उस रात तू
दुश्मन की सीमा में जा लिया

बलवान बोला सर जी! ये बताओ
कि वो किस से पूछ के आये थे
सोये फौजियों के सिर काटने का
फरमान कोन से बाप से लाये थे

बलवान का जवाब में सवाल दागना
अफसरों को पसंद नही आया
और बीच वाले अफसर ने लिखने
के लिए जल्दी से पेन उठाया

एक बोला बलवान हमें ऊपर
जवाब देना है और तेरे काटे हुए
सिर का पूरा हिसाब देना है

तेरी इस करतूत ने हमारी नाक कटवा दी
अंतरास्ट्रीय बिरादरी में तूने थू थू करवा दी

बलवान खून का कड़वा घूंट पी के रह गया
आँख में आया आंसू भीतर को ही बह गया

बोला साहब जी! अगर कोई
आपकी माँ की इज्जत लूटता हो
आपकी बहन बेटी या पत्नी को
सरेआम मारता कूटता हो

तो आप पहले अपने बाप का
हुकमनामा लाओगे ?
या फिर अपने घर की लुटती
इज्जत खुद बचाओगे?

अफसर नीचे झाँकने लगा
एक ही जगह पर ताकने लगा

बलवान बोला साहब जी गाँव का
ग्वार हूँ बस इतना जानता हूँ
कौन कहाँ है देश का दुश्मन सरहद
पे खड़ा खड़ा पहचानता हूँ

सीधा सा आदमी हूँ साहब !
मै कोई आंधी नहीं हूँ
थप्पड़ खा गाल आगे कर दूँ
मै वो गांधी नहीं हूँ

अगर सरहद पे खड़े होकर गोली
न चलाने की मुनादी है
तो फिर साहब जी ! माफ़ करना
ये काहे की आजादी है

सुनों साहब जी ! सरहद पे
जब जब भी छिड़ी लडाई है
भारत माँ दुश्मन से नही आप
जैसों से हारती आई है

वोटों की राजनीति साहब जी
लोकतंत्र का मैल है
और भारतीय सेना इस राजनीति
की रखैल है

ये क्या हुकम देंगे हमें जो
खुद ही भिखारी हैं
किन्नर है सारे के सारे न कोई
नर है न नारी है

ज्यादा कुछ कहूँ तो साहब जी
दोनों हाथ जोड़ के माफ़ी है
दुश्मन का पेशाब निकालने
को तो हमारी आँख ही काफी है

और साहब जी एक बात बताओ
वर्तमान से थोडा सा पीछे जाओ

कारगिल में जब मैंने अपना पंजाब
वाला यार जसवंत खोया था
आप गवाह हो साहब जी उस वक्त
मै बिल्कुल भी नहीं रोया था

खुद उसके शरीर को उसके गाँव
जाकर मै उतार कर आया था
उसके दोनों बच्चों के सिर साहब जी
मै पुचकार कर आया था

पर उस दिन रोया मै जब उसकी
घरवाली होंसला छोड़ती दिखी
और लघु सचिवालय में वो चपरासी
के हाथ पांव जोड़ती दिखी

आग लग गयी साहब जी दिल
किया कि सबके छक्के छुड़ा दूँ
चपरासी और उस चरित्रहीन
अफसर को मै गोली से उड़ा दूँ

एक लाख की आस में भाभी
आज भी धक्के खाती है
दो मासूमो की चमड़ी धूप में
यूँही झुलसी जाती है

और साहब जी ! शहीद जोगिन्दर
को तो नहीं भूले होंगे आप
घर में जवान बहन थी जिसकी
और अँधा था जिसका बाप

अब बाप हर रोज लड़की को
कमरे में बंद करके आता है
और स्टेशन पर एक रूपये के
लिए जोर से चिल्लाता है

पता नही कितने जोगिन्दर जसवंत
यूँ अपनी जान गवांते हैं
और उनके परिजन मासूम बच्चे
यूँ दर दर की ठोकरें खाते हैं..

भरे गले से तीसरा अफसर बोला
बात को और ज्यादा न बढाओ
उस रात क्या- क्या हुआ था बस
यही अपनी सफाई में बताओ

भरी आँखों से हँसते हुए बलवान
बोलने लगा
उसका हर बोल सबके कलेजों
को छोलने लगा

साहब जी ! उस हमले की रात
हमने सन्देश भेजे लगातार सात

हर बार की तरह कोई जवाब नही आया
दो जवान मारे गए पर कोई हिसाब नही आया

चौंकी पे जमे जवान लगातार
गोलीबारी में मारे जा रहे थे
और हम दुश्मन से नहीं अपने
हेडक्वार्टर से हारे जा रहे थे

फिर दुश्मन के हाथ में कटार देख
मेरा सिर चकरा गया
गुरमेल का कटा हुआ सिर जब
दुश्मन के हाथ में आ गया

फेंक दिया ट्रांसमीटर मैंने और
कुछ भी सूझ नहीं आई थी
बिन आदेश के पहली मर्तबा सर !
मैंने बन्दूक उठाई थी

गुरमेल का सिर लिए दुश्मन
रेखा पार कर गया
पीछे पीछे मै भी अपने पांव
उसकी धरती पे धर गया

पर वापिस हार का मुँह देख के
न आया हूँ
वो एक काट कर ले गए थे
मै दो काटकर लाया हूँ

इस ब्यान का कोर्ट में न जाने
कैसा असर गया
पूरे ही कमरे में एक सन्नाटा
सा पसर गया

पूरे का पूरा माहौल बस एक ही
सवाल में खो रहा था
कि कोर्ट मार्शल फौजी का था
या पूरे देश का हो रहा था ?

⚔️जय हिंद की सेना⚔️

⚔️जय जवान जय किसान⚔️

👉दीवाना 🔥भगतसिंह🔥 का
⚔️🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳⚔️

Saturday, 4 January 2020

जरा तो सोचो हम कहां जा रहे हैं

हमारा सुरक्षित आज ही बेहतर कल को जन्म दे सकता है। लेकिन हम ठहरे दानवीर जो व्यर्थ में ही समय का नाश करते हुए स्वयं अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। दरअसल
प्रयोजनहीन जानवर को पशु की संज्ञा दी जाती है और प्रयोजनहीन मनुष्यों को मानवावतार में पशु की। पशु का दिमाग खाली होता है जो कि शैतानियत का जनक होता है, ऐसी ही शैतानियत वर्तमान समय में हमारे भीतर घर कर चुकी है, जिसे निकालना बहुत जरूरी है वरना इस वतन की संस्कृति और सभ्यता काल के गाल मे समाहित हो जायेगी।

देश का युवा सोशल मीडिया का गुलाम बन बैठा है जो भारत के भविष्य पर खतरे में है। ( उपयोग करो लेकिन अति......)

राजनीतिक रोटियां सेंकने के प्रयोजन से मां भारती के आंचल पर सांप्रदायिकता का कीचड़ उछालने में लोगों को जरा भी हर्ज नहीं....

आपराधिक गतिविधियां प्रकाश की चाल चल रही हैं

महिला सुरक्षा की माली हालत से भला कौन अनभिज्ञ होगा

आतंकवाद पैर पसार के सो रहा है


Wednesday, 18 December 2019

विद्यार्थियों के लिए परीक्षा संबंधी प्रेरणादायक कविता( Motivational Poem)

नमस्कार ब्लॉगर परिवार
आज आपके सामने मैं फिर से परीक्षाओं से संबंधित एक प्रेरणा युक्त स्वरचित कविता लेकर प्रस्तुत हूँ -
Motivational lines-



पहाड़ो को चीर सकते हो यदि तुम ठान लो तो
जंग यह जीत सकते हो, खुद को पहचान लो तो
क्यों यह मान लिया तुमने कि शिक्षा एक मजबूरी है
लड़ाई खुद की खुद से है, जीतना बहुत जरूरी है
रुककर बीच राहों में हाथ ना मलते रहना
कांटे आए या चट्टाने सावधानी से चलते रहना
बहुत होंगे गिराने वाले, तुम आगे बढ़ने का कारण देखो ना
अनमोल है जिंदगी की गेंदे इन्हें व्यर्थ में ना फेंको ना
आसमान छूने वालों को तूफान कभी रोक नहीं पाया है
जो रोज रोता है हालातों को, जान वो झोंक नहीं पाया है
अगर घमंड है किसी को तो हम तोड़ भी सकते हैं
दृढ़ निश्चय कर लिया तो दिशाएं मोड भी सकते हैं
अच्छी करो पढ़ाई तुमको अच्छे नंबर लाना है
अपनी मेहनत से तुमको अब सबका मान बढ़ाना है
जो बन न पाया आज तक,वह इतिहास बनाना है
जान लो,पहचान लो,तुम ठान लो अबके अव्वल आना है
यत्न कुछ यूं करो कि तुम एक अच्छे इंसान बनो
कर्म बड़े करो तुम और देश की शान बनो
जीत का जज्बा हार के डर से ज्यादा रखना है
पश्चिमी हवाओं में नहीं बहना, देश की मर्यादा रखना है

धन्यवाद ब्लॉगर परिवार
आपका शुभेच्छु
Rajendra Indian
जय हिंद जय भारत जय भारतीय वीर जय भारतीय सेना

अलंकार संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी, अभ्यास प्रश्न

नमस्कार ब्लॉगर परिवार आज मैं आप सभी के साथ अलंकार संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी सांझा करने जा रहा हूं जो किसी भी प्रतियोगी परीक्षा से पहले आप की तैयारियों को जांचने के लिए आधार प्रदान करेगी-
निर्देश :- 1. दी गई पंक्तियों में उपस्थित अलंकार की पहचान कीजिए( एक से अधिक अलंकार उपस्थित होने पर प्रत्येक का विवरण दीजिए तथा उस अलंकार संबंधी पहचान को रेखांकित कीजिए)।
2. आप प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देने के लिए स्वतंत्र हैं ,कोई नकारात्मक अंकन नहीं होगा।

प्र.1 दिवसावसान का समय मेघमय,आसमान से उतर रही है, वह संध्या-सुन्दरी परी सी धीर-धीरे-

प्र.2 पापी मनुज भी आज मुख से, राम नाम निकालते

प्र.3 सुवरण को खोजत फिरत कवि व्यभिचारी चोर

प्र.4 पूत कपूत तो क्यों धन संचय, पूत सपूत तो क्यों धन संचय

प्र.5 जलता है ये जीवन पतंग

प्र.6 सजना है मुझे सजना के लिए

प्र.7 सिर फट गया उसका वही मानो अरुण रंग का घड़ा

प्र.8 सोहत ओढ़े पीत पट, श्याम सलोने गात। मनहु नीलमणि शैल पर, आतप परयो प्रभात

प्र.9 हनुमान की पूछं मे लगन न पाई आग ,लंका सारी जल गई गए निसाचर भाग

प्र.10 फिर चहक उठे ये पुंज-पुंज कल- कूजित कर उर का निकुंज चिर सुभग-सुभग

प्र.11 जीवन क्या है? निर्झर है ,मस्ती ही इसका पानी है

प्र.12 मुख बाल-रवि-सम लाल होकर, ज्वाल-सा बोधित हुआ

प्र.13 चिरजीवो जोरी जुरे क्यों न सनेह गंभीर को घटि ये वृष भानुजा ,वे हलधर के बीर

प्र.14 मिटा मोदु मन भए मलीने ,विधि निधि दीन्ह लेत जनु छीने

प्र.15 तो पर वारौं उरबसी सुनि राधिके सुजान तू मोहन के उरबसी ह्वै उरबसी समान

प्र.16 मधुर -मधुर मुसकान मनोहर ,मनुज वेश का उजियारा

प्र.17 छोरटी है गोरटी या चोरटी अहीर की

प्र.18 मन-सागर, मनसा लहरि, बूड़े-बहे अनेक

प्र.19 या अनुरागी चित्त की, गति समुझै नहिं कोय ,ज्यों-ज्यों बूड़ै स्याम रंग, त्यों-त्यों उज्जवल होय

प्र.20 चंचला स्नान कर आए, चंद्रिका पर्व में जैसे ,उस पावन तन की शोभा, आलोक मधुर थी ऐसे

प्र.21 भजन कह्यौ ताते भज्यौ, भज्यौ न एको बार ,दूरि भजन जाते कह्यौ, सो ते भज्यो गॅवार

प्र.22 विदग्ध होके कण धूलि-राशि का,तपे हुए लौह-कणों समान

प्र.23 लट-लटकनि मनु मत्त मधुपगन मादक मदहिं पिए

प्र.24 सिर झुका तूने नियति की मान ली यह बात,स्वयं ही मुझ गया तेरा हृदय-जलजात

प्र.25 मीठी लगै अँखियान लुनाई

 धन्यवाद,शुक्रिया, अभिनंदन, आभार

 जीतना बहुत जरूरी है खुद की खुद से जो लड़ाई है
 लोग तो पहाड़ों को चीर देते हैं, यह तो सिर्फ पढ़ाई है
 काम ऐसा करो कि जीवन का मातम खुशहाली में ढल जाए
 चलते रहो जब तक कि लोगों की गाली,ताली में बदल जाए
 आपका शुभेच्छु
राजेन्द्र भारतीय
 जय हिंद जय भारत जय भारतीय वीर जय भारतीय सेना

Wednesday, 20 November 2019

शहीद 🔥भगतसिंह🔥 साहेब

आजादी का एक दीवाना नाम भगत सिंह लिखता था
गली के बाकी सारे बच्चो जैसा ही तो दिखता था
सब गुड्डे गुड़िया खेलते थे उसको आजादी प्यारी थी
उसके दिल में इंक़लाब की दबी हुई चिंगारी थी
उसकी आँखों के ही सामने जलिया वाला बाग़ हुआ
जनरल डायर के आदेशो पर वो खूनी फाग हुआ
उस दबी हुई चिंगारी ने फिर जन्म दिया एक ज्वाला को
क्रन्तिकारी बना भगत सिंह,त्याग प्रेम की माला को
सांडर्स को मारा बलिदानो की कसम भगत ने खाई थी
किये धमाके संसद में और बेहरो को गूँज सुनाई थी
भेजा जेल भगत सिंह को, उलटी गोरों की चाल हुई
पहली बार ११६ दिन की भूख हड़ताल हुई
भगत सिंह को पीटा और सुखदेव गुरु का संग मिला
ज़ख़्म से रिसते लहू में उनके आजादी का रंग मिला
वो अड़ा रहा की जिसने सपने इंक़लाब के देखे थे
उस मुछ की ताव के आगे घुटने गोरों ने भी टेके थे
दोषी सिद्ध हो रहे थे वो मौत का पंजा कसता था
जज को देखकर भगत सिंह दीवानों जैसा हँसता था
जो चाहा था भगत ने आखिर का वो अंजाम हुआ
तीनों को फांसी दी जाये, फिर कोर्ट में ये ऐलान हुआ
माँ से मिलकर बोला बेबे मैं दूध का कर्ज चुकाऊंगा
हर आजादी के दीवाने में नज़र तुझे में आऊंगा
माँ से बोला रोना मत, ये भारत मेरी माता है
रोये या गर्व करे माँ के तो कुछ भी समझ न आता है
२३ मार्च का दिन आया ये भूमण्डल भी डोल उठा
जेल का हर इक कोना उस दिन रंग दे बसंती बोल उठा
भगत सिंह की अमित शहादत नियति भांप गयी होगी
जब चूमा होगा भगत सिंह ने रस्सी काँप गई होगी
पत्थर से दिलवाले गोरों के दिल भी पिघल गए होंगे
जल्लादों की आँखों से भी आसूं निकल गए होंगे
देह छोड़ दी भगत सिंह ने, एक इबादत गूँज उठा
इंक़लाब के नारों से ये सारा भारत गूंज उठा
२३ साल का एक लड़का जो आज़ादी का दीवाना था
शहीदे -इ- आजम वो कहलाया, तुम्हे यही बतलाना था
आजादी के अफ़सानो जब जब एक शायर गाएगा
सुखदेव भगत और गुरु तुम्हारा नाम हमेशा आएगा।
🇮🇳इंक़लाब ज़िंदाबाद🇮🇳
👉दीवाना भगतसिंह का👈

Sunday, 3 November 2019

भारत आज और कल, समस्याएं और विश्लेषण

नमस्कार ब्लॉगर परिवार
भारत माता आज विभिन्न समस्याओं से गुजर रही है जिनमें से कुछ के बारे में मैं अपने एक मौलिक कविता के माध्यम से बताना चाहूंगा। किसी भी भाषा संबंधी त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थी हूं।


हाथ हाथ को खा रहा यह कैसा कलयुग आया है
उदास है मां भारती आंगन में मातम छाया है
भरमार हो गई हर जगह देखो चांदी के जूतों की
तूती खूब बोलती है अब भ्रष्टाचारी दूतों की
उम्र 3 साल थी कि खबरें रेंप की आ गई अखबारों में
ना सुरक्षित हैं वह खुले आसमान तले और ना सुरक्षित है घर की दीवारों में
ईमानदारी मिट गई, सत्य का गला भर आया है
उदास है मां भारती आंगन में मातम छाया है
हिंदी अबला रह गई,अंग्रेजी सबको भाती है
महक मिट्टी की भूल गए पश्चिम की हवाएं आती है
गाज गिरी है शिक्षा पर,इसे क्यों धंधा बना दिया
पश्चिम का अंधानुकरण,भारत को अंधा बना दिया
जनसंख्या वृद्धि में मानो प्रकाश की चाल है
आज मां भारती के प्रांगण का हाल बेहाल है
आधी जनता हिंदुस्तानी चैन की राह सो नहीं पाती है
अभी भी कुछ गरीबों को दो जून की रोटी भी नसीब हो नहीं पाती है
गरीब गरीब रह गया,अमीर उत्तम से सर्वोत्तम आया है
उदास है मां भारती आंगन में मातम छाया है
रोज लड़ाई होती है अब धर्म,रंगऔर जाति पर
इतने ही वीर पुरुष हैं तो जाकर गोली क्यों ना खाते छाती पर
राह चलते पथिक के मार्ग में क्यों कचरे के ढेर बने फिरते हैं
ऐसा लगता है मानो गली के कुत्ते शेर बने फिरते हैं
कुछ दुष्ट राह बताते हैं उन आताताईयों को
पनाह देते हैं घरों में उन सौतेले भाईयों को
हाथ हाथ को खा रहा यह कैसा कलयुग आया है
उदास है मां भारती आंगन में मातम छाया है

धन्यवाद ब्लॉगर परिवार
भारत मां की सेवा करने का कष्ट करें, इसके हृदय को कष्ट ना दें

जय हिंद जय भारत जय भारतीय वीर जय भारतीय सेना








Thursday, 17 October 2019

बेटियों के जीवन पर मंडराते संकट के बादल, कविता राजेन्द्र भारतीय



नमस्कार ब्लॉगर परिवार

मां-बाप की पहचान है बेटियां
भूत,भविष्य और वर्तमान की शान है बेटियां
करना तो बहुत कुछ चाहती है बेटियां पर लोक लाज से डर जाती हैं
कुंठित मन कुंठित रह जाते हैं, खुले दिलों के जीवन में रंग बेटियां लाती हैं
इस सदी में बेटियां परिवर्तन की अलख जगा सकती हैं
अगर ठान ले बेटियां तो सारी रूढ़िवादिताएं भगा सकती है
लक्ष्मी बाई, कालीबाई और हिमा दास से नाम हैं उनके
वीरता, कर्तव्य पालन और देशभक्ति से काम हैं उनके
जो लिखा अभी तक वे खूब सुनहरी बाते हैं
पर यह मत भूलो कि अभी भी करोड़ों ग्रामवासिनी बेटियों के जीवन में दिन में भी काली राते हैं
क्या खूब विडंबना है पग-पग पर उनके जीवन पर संकट छाया है
हर और राक्षस बैठे हैं ,यह कैसा कलयुग आया है
उम्र 3 साल थी की खबरें रेंप की आ गई अखबारों में
ना सुरक्षित है वह खुले आसमान तले और ना सुरक्षित है घर की दीवारों में
शादी आजकल वर पक्ष का एटीएम बन गया है
बेटा चपरासी क्या बना,दहेज ऐसे मांगते हैं मानों पीएम बन गया है
गरीब मां बाप की बेटी दांपत्य जीवन में भी कहां खुश रह पाती है
फंदे से झूलना पड़ता है उसे क्योंकि वह दहेज प्रताड़ना सह नहीं पाती है
तन मन से सोचो तो क्या ये परिस्थितियां कन्या भ्रूण हत्या के लिए मां-बाप को मजबूर नहीं करती
जानो दिल से एक बार कि क्या यह बेटियों के सपनों को चकनाचूर नहीं करती
कामवासना छोड़ो मत लूटो सम्मान तुम नारी का
क्यों जीवन बिगड़ते हो किसी की आशा का और किसी की प्यारी का
अगर ऐसा ही रहा तो मानवता का स्वाभिमान झुक जाएगा
फिर देख लेना यह मानव जीवन रथ रूक जायेगा


महिलाओं का सम्मान करें।

धन्यवाद ब्लॉगर परिवार
जय हिंद जय भारत जय भारतीय वीर जय भारतीय सेना